साऊंघाट (बस्ती) - बेल्जियम से चला 200 टन वजनी 'साइक्लीजेशन रिएक्टर' लेकर 308 पहियों वाला महाबली ट्रक आखिरकार यूपी के बस्ती पहुंच गया। सोमवार सुबह 10 बजे जब यह पॉलिटेक्निक चौराहे पर पहुंचा तो इसे देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग मोबाइल से रील और वीडियो बनाने लगे, लेकिन दूसरी तरफ इसी ट्रक की वजह से इलाके में घंटों बिजली गुल रही।यह विशाल उपकरण समुद्री जहाज से उड़ीसा के पारादीप पोर्ट लाया गया था। 15 मई 2026 को वहां से चले इस ट्रक ने चंदौली, वाराणसी, गाजीपुर, मऊ, गोरखपुर, संतकबीरनगर होते हुए बस्ती में एंट्री की। इसे लखीमपुर खीरी के कुंभी में लग रहे देश के पहले बायोप्लास्टिक प्लांट में ले जाया जा रहा है, जहां गन्ने से बायोप्लास्टिक बनाया जाएगा।तार काटने पड़े, 7 उपकेंद्र ठपइस ट्रक की सबसे बड़ी दिक्कत इसकी हाइट है। लंबाई 41 मीटर, चौड़ाई 7 मीटर और ऊंचाई करीब 8 मीटर, यानी तीन मंजिला मकान के बराबर। इतनी ऊंचाई के कारण हाई-टेंशन और LT लाइनों से टकराने का खतरा था।इसीलिए बिजली विभाग ने एहतियात के तौर पर 7 उपकेंद्रों - मुंडेरवा, मंगेरवा, ऊंचगांव, व्योतहरा, गाउखोर, सल्टौआ, बाघनगर और पॉलिटेक्निक उपकेंद्र की सप्लाई बंद कर दी। कई जगह तो तारों को काटकर नीचे करना पड़ा। पॉलिटेक्निक चौराहे पर ही इसे निकालने में साढ़े तीन घंटे की मशक्कत लगी। मौके पर दो SDO, आधा दर्जन JE, NHAI और पुलिस की टीम तैनात रही।6 महीने का सफर, 50 लोगों की टीमइस महाबली ट्रक के साथ 50 लोगों का विशेष अमला चल रहा है। दो बड़ी क्रेन, जेसीबी और 14 गाड़ियों का काफिला साथ है। कई जगह टोल प्लाजा पर यह फिट नहीं हुआ तो NHAI को बगल में कच्ची सड़क बनानी पड़ी। कहीं पेड़ काटने पड़े तो कहीं साइन बोर्ड हटाने पड़े।इसकी रफ्तार सिर्फ 5 से 8 किमी प्रति घंटा है और रोजाना 200 लीटर डीजल खर्च हो रहा है। झारखंड तक यह 308 पहियों पर था, लेकिन मोड़ पर दिक्कत से अब 250 पहियों पर चल रहा है।बस्ती के बाद अब यह काफिला गोंडा, अयोध्या होते हुए लखीमपुर खीरी जाएगा। पूरे पूर्वांचल में यह ट्रक कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।
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