ट्रेन में रिजर्वेशन कराके निश्चिंत होकर सोना अब रेलवे की जिम्मेदारी है, ये बात दिल्ली कंज्यूमर कोर्ट ने साफ कर दी है।पूरा मामला क्या है?7 जून 2014 को अजय कुमार महानंदा एक्सप्रेस में दिल्ली से पटना जा रहे थे। पुरानी दिल्ली स्टेशन पर दो लोग उनके रिजर्व डिब्बे में घुसे और उनका ट्रॉली बैग उठाकर भाग गए। बैग में साड़ी, गहने और कपड़े थे जिनकी कीमत 1.20 लाख बताई गई।उन्होंने तुरंत TTE से कहा, RPF को बताया। RPF ने 7 सितंबर 2014 को चोरी कन्फर्म भी कर दी, पर FIR की जानकारी नहीं दी। अजय कुमार का आरोप है कि रेलवे ने किसी और के नंबर पर केस का अपडेट भेज दिया। आखिर में 23 अप्रैल 2015 को जाकर FIR लिखी गई और 15 मई 2017 को केस को 'अनट्रेस्ड' बोलकर बंद कर दिया गया।रेलवे ने क्या कहा?रेलवे ने कोर्ट में कहा - सामान यात्री की अपनी जिम्मेदारी में था, हमारे पास बुक नहीं था, तो हम जिम्मेदार नहीं।कोर्ट ने क्या कहा?जिला आयोग ने 16 अप्रैल 2024 को रेलवे को दोषी माना और आदेश दिया - 1.20 लाख पर 7 सितंबर 2017 से 9% सालाना ब्याज दो, और ऊपर से मानसिक परेशानी के 25 हजार अलग से दो।रेलवे अपील लेकर स्टेट आयोग पहुंचा। जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल और बिमला कुमारी की बेंच ने 6 अक्टूबर को रेलवे की अपील खारिज कर दी।कोर्ट ने दो टूक कहा - रिजर्व कोच में बिना टिकट वाले को रोकना आपकी ड्यूटी है। आप ये कहकर नहीं बच सकते कि सामान यात्री देखेगा। सवाल ये है कि चोर रिजर्व में घुसा कैसे?रेलवे तो TTE की ड्यूटी लिस्ट, लॉगबुक तक नहीं दिखा पाया कि उस दिन कौन ड्यूटी पर था। कोर्ट ने कहा दस्तावेज नहीं दिखाना मतलब आपने लापरवाही की है।अब रेलवे को पूरा पैसा ब्याज के साथ देना ही पड़ेगा।
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